-दुनिया में पहली बार ‘हाइब्रिड कपल’!
-स्पेनी आर्टिस्ट करेगी यह शादी
-अलिसिया का पति होगा एक डिजिटल कृति
(फोटो : होलोग्राम)
मेड्रिड। स्पेन की एक महिला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से बने पार्टनर से शादी करने जा रही है। यह दुनिया का पहला हाइब्रिड कपल होगा, जिसमें एक इंसान जीता-जागता होगा तो दूसरा आर्टिफिशियल होगा, यानी बनावटी होगा। दुनिया में पहली बार एक जीता-जागता इंसान वर्चुअल पार्टनर से शादी करेगा। आर्टिस्ट अलिसिया फ्रेमिस एआई से जेनरेट किए गए होलोग्राम से शादी करने जा रही है। यानी अब तक जो चीजें साइंस फिक्शन फिल्मों में देखी जाती रही हैं, वे अब असलियत का रूप ले रही हैं। अलिसिया का पति एक डिजिटल कृति होगा जो होलोग्राफिक तकनीक और मशीन लर्निंग की मदद से बनाया गया होगा। अलिसिया दुनिया की पहली ऐसी महिला होंगी जो इस तरह की शादी करने जा रही हैं। हाइब्रिड कपल नामक अकाउंट से Instagram पर इसके बारे में कई पोस्ट भी शेयर किए हैं।
शादी का वेन्यु भी बुक
भविष्य में होने वाली शादियों और भविष्य के रिलेशनशिप के लिए यह एक बड़ा संकेत दे रहा है कि आने वाले समय में रिश्तों का किस तरह का रूप देखने को मिल सकता है। वायोन्यूज के अनुसार, अलिसिया अपनी शादी का वेन्यु भी बुक कर चुकी हैं और उनकी शादी की ड्रेस भी बनवा रही हैं। अलिसिया के मुताबिक उनके हस्बेंड का नाम एईलेक्स होगा और वह एक अधेड़ उम्र का मेल होलोग्राम होगा।
गर्मियों में होगी यह शादी
फ्रेमिस इस एआई होलोग्राम एईलेक्स के साथ 2024 की गर्मियों में शादी करने जा रही हैं। फ्रेमिस ने कहा, ‘रोबोट्स के साथ प्यार और यौन संबंध एक ऐसी सच्चाई है जो घटकर रहेगी। वे अच्छे साथी साबित हो सकते हैं और हमदर्द भी बन सकते हैं। जिस तरह से मोबाइल फोन हमें अकेलेपन से बचाते हैं, उसी तरह होलोग्राम अब उससे एक कदम और आगे हमारी जिंदगी में शामिल हो सकते हैं।’ आर्टिस्ट का कहना है कि एआई और मनुष्य का मेल उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है जिन्हें किसी के साथ की जरूरत है। आने वाले कुछ सालों के भीतर इस चलन में काफी बढ़ोत्तरी देखे जाने की बात यहां कही गई है।
शादी का मकसद
इस तरह की शादी से पता चलता है कि भविष्य में लोग अपनी पसंद का डिजिटल पार्टनर खुद बनाना शुरू कर देंगे। दरअसल फ्रेमिस की इस शादी के पीछे उनका एक मकसद छिपा है। महिला अपने एक नए प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं जिसका नाम हाइब्रिड कपल है। प्रोजेक्ट के तहत महिला प्यार, आत्मीयता, और पहचान की सीमाओं के साथ प्रयोग करने जा रही हैं। फ्रेमिस का कहना है कि वह एक्सप्लोर करना चाहती हैं कि डेली लाइफ में एक होलोग्राम के साथ रहना कैसा लगता है।
स्वामीनारायण संप्रदाय के साधु खाते हैं 5 कठोर कसमें
-यूएई के पहले हिंदू मंदिर का निर्माण किया है इसी संप्रदाय ने
(फोटो : स्वामी नारायण 1,2,3)
संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबूधाबी में पहले हिंदू मंदिर का उद्घाटन हो चुका है। इस भव्य मंदिर का निर्माण बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बैप्स) ने किया है। आइए जानते हैं, क्या है बैप्स संस्था जिसने यूएई में पहले हिंदू मंदिर का निर्माण किया…
बैप्स का पूरा नाम
बैप्स का पूरा नाम बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था है। यह एक सामाजिक-आध्यात्मिक संस्था है। इसकी नींव भगवान स्वामीनारायण ने 18वीं शताब्दी के आखिर में रखी थी। बाद में साल 1907 में शास्त्रीजी महाराज ने विधिवत स्थापना की।
भगवान स्वामीनारायण का जन्म
भगवान स्वामीनारायण का जन्म साल 1781 में अयोध्या के छपैया या छपिया गांव में हुआ था। बचपन में उन्हें घनश्याम पांडे या नीलकंठ के नाम से जाना जाता था। बैप्स स्वामीनारायण रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. जनक दवे बताते हैं कि घनश्याम पांडे (भगवान स्वामीनारायण) का आठवें साल में जनेऊ संस्कार हुआ और उन्होंने 11 साल की उम्र तक विधिवत शास्त्रों का अध्ययन किया। 11वें साल गृह त्याग दिया। 18 साल की उम्र तक पूरे भारत की पैदल यात्रा की। युवा नीलकंठ 18वें वर्ष गुजरात के सौराष्ट्र आ गए। यहां लोजपुर गांव में उद्धव संप्रदाय के संस्थापक रामानंद स्वामी के शिष्य बन गए। बाद में रामानंद स्वामी ने नीलकंठ को उद्धव संप्रदाय का प्रमुख बनाया। कालांतर में नीलकंठ अपने अनुयायियों के बीच ‘भगवान स्वामीनारायण’ के नाम से मशहूर हुए। 1830 में महज 49 साल की उम्र में सौराष्ट्र के गडपुर नाम के गांव में आखिरी सांस ली।
स्वामीनारायण संप्रदाय
स्वामीनारायण संप्रदाय के लोग भक्ति संप्रदाय को मानते हैं। इस संप्रदाय की मान्यता है कि मनुष्य को अपने उद्धार के लिए किसी संत की शरण में जाना ही पड़ता है। डॉ. जनक दवे बताते हैं कि स्वामीनारायण संप्रदाय का ”विशिष्टताद्वैत” से भी करीबी संबंध है, जिसका संबंध रामानुजाचार्य है। स्वामीनारायण संप्रदाय के साधु भगवान स्वामीनारायण की पूजा करते हैं।
भगवान स्वामीनारायण ने अपने जीवनकाल में छह मंदिरों की स्थापना की थी। ये मंदिर अहमदाबाद, भुज, वड़ताल, जूनागढ़ और गजड़ा या गडपुर में हैं। इनमें उन्होंने लक्ष्मीनारायण, नर नारायण और भारत के तमाम देवी देवताओं की मूर्तियां स्थापित की थीं। आज अक्षरधाम समेत स्वामीनारायण संप्रदाय के प्रत्येक मंदिर में भगवान स्वामीनारायण की प्रमुखता से पूजा होती है।
ये पांच कसमें खाते अनुयायी
स्वामीनारायण संप्रदाय से जुड़े साधुओं और अनुयायियों को 5 कसमें दिलाई जाती हैं। जिनमें शराब, व्यसन, व्यभिचार, मांस से दूरी और शरीर व मन की अशुद्धता शामिल है। इन 5 व्रतों का आजीवन पालन करना होता है।
दुनियाभर में 1200 मंदिर
बैप्स स्वामीनारायण संस्था के दुनिया भर में 1200 से ज्यादा मंदिर हैं। भारत की बात करें तो यहां बैप्स 800 के करीब छोटे-बड़े मंदिर हैं। दिल्ली का अक्षरधाम मंदिर भी बैप्स स्वामीनारायण संस्था का ही है। भारत समेत दुनिया भर में स्वामीनारायण संप्रदाय के 10 लाख से ज्यादा अनुयायी या फॉलोअर हैं। स्वामीनारायण संप्रदाय के ‘प्रमुख स्वामी’ महाराज शांतिलाल पटेल का साल 2016 में निधन हो गया था। अभी साधु केशव जीवन दास बैप्स के ‘प्रमुख महंत’ स्वामी हैं।
0000

