आदि कैलाश, ओम पर्वत का दर्शन कराएगी थॉमस कुक

हेलीकॉप्टर से तीर्थयात्रा

नई दिल्ली। देश में आध्यात्मिक पर्यटन की मांग बढ़ने के बीच थॉमस कुक इंडिया और उसकी समूह कंपनी एसओटीसी ट्रैवल ने उत्तराखंड में आदि कैलाश और ओम पर्वत के हेलीकॉप्टर दर्शन की पेशकश की है। कंपनी ने बुधवार को इस संबंध में उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड के साथ साझेदारी की घोषणा की। इस पांच-दिवसीय आध्यात्मिक यात्रा की दर 90,000 रुपये प्रति यात्री रखी गई है। इस पर उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड की तरफ से सब्सिडी दी जाती है। इस आध्यामिक यात्रा का आधार शिविर उत्तराखंड में स्थित पिथौरागढ़ होगा। दूसरे दिन से दर्शन का सिलसिला शुरू होगा। दूसरे दिन मनोकामना मंदिर के दर्शन और तीसरे दिन आदि कैलाश एवं ओम पर्वत के दर्शन कराए जाएंगे। इस यात्रा के हरेक समूह में 14 लोग शामिल होंगे। थॉमस कुक इंडिया ने बयान में कहा कि इस पैकेज में आदि कैलाश और ओम पर्वत के लिए हेलीकॉप्टर से दर्शन की सुविधा, पार्वती सरोवर मंदिर जाने के लिए एक एटीवी (सभी तरह की सतह पर चलने वाला वाहन) और खानपान शामिल हैं।

भारत में आध्यात्मिक पर्यटन

थॉमस कुक (इंडिया) लिमिटेड के अध्यक्ष एवं कंट्री प्रमुख (छुट्टियां, वीज़ा) राजीव काले ने कहा, हमारा उद्देश्य अभी तक कम सामने आए पवित्र स्थलों को उजागर कर भारत में आध्यात्मिक पर्यटन को नए सिरे से परिभाषित करना है। थॉमस कुक और एसओटीसी के आंकड़े बताते हैं कि देश में आध्यात्मिक पर्यटन सालाना आधार पर 100 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है।

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स्वीकार नहीं किए रामदेव, बालकृष्ण के ‘माफीनामे’

सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने भ्रामक विज्ञापन मामले में योग गुरु रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (एमडी) आचार्य बालकृष्ण द्वारा बिना शर्त माफी मांगने के लिए दायर किए गए हलफनामों को स्वीकार करने से बुधवार को इंकार कर दिया। कोर्ट कहा कि उन्होंने ऐसा तब किया जब ‘उनकी गलती पकड़ ली गई। न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, हम इस मामले में इतने उदार नहीं बनना चाहते। न्यायालय ने इस मामले पर निष्क्रियता बरतने के लिए राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण के प्रति भी कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि वह इसे हल्के में नहीं लेगा। पीठ ने कहा, हम आपकी बखिया उधेड़ देंगे। शीर्ष अदालत ने कहा कि जब रामदेव और बालकृष्ण को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किए गए और उन्हें अदालत के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया, तो उन्होंने उस स्थिति से ‘बचने का प्रयास किया’ जहां व्यक्तिगत पेशी जरूरी थी। न्यायालय ने कहा कि यह ‘बेहद अस्वीकार्य’ है।

पीठ ने आदेश सुनाते हुए कहा, मामले के पूरे इतिहास और अवमाननाकर्ताओं के पिछले आचरण को ध्यान में रखते हुए हम उनके द्वारा दायर नवीनतम हलफनामे को स्वीकार करने के अनुरोध पर अपनी आपत्ति व्यक्त करते हैं। न्यायालय ने मामले में आगे की सुनवाई के लिए 16 अप्रैल की तारीख तय की। शीर्ष अदालत ने प्राधिकरण के प्रति अप्रसन्नता जताते हुए कहा, हम यह जानकर चकित हैं कि फाइलों को आगे बढ़ाने के अलावा राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने कुछ नहीं किया और वह चार-पांच साल से इस मुद्दे को लेकर ‘गहरी नींद’ में था। न्यायालय ने प्राधिकरण की ओर से उपस्थित राज्य के अधिकारी से इस निष्क्रियता का कारण पूछा।

कोर्ट की ऐसी टिप्पणी

पीठ ने रामदेव और बालकृष्ण की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी से कहा, हम इसे स्वीकार करने या माफ करने से इंकार करते हैं। हम इसे आदेश का जानबूझकर किया गया उल्लंघन और वचनबद्धता का उल्लंघन मानते हैं। रामदेव और बालकृष्ण ने अपने औषधीय उत्पादों के असर के बारे में बड़े-बड़े दावे करने वाले विज्ञापनों को लेकर उच्चतम न्यायालय में बिना शर्त माफी’ मांगी थी।

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