हूती अटैक का शिकार हुए जहाज को किया रेस्क्यू

-भारतीय नौसेना का एक बार फिर बड़ा कारनामा, 21 लोगों को बचाया

-अदन की खाड़ी में किया गया था मिसाइल अटैक

-3 क्रू मेंबर्स की मौत हो गई और 6 लोग घायल

-नेवी ने रेस्क्यू का शेयर किया वीडियो

(फोटो : जहाज)

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना ने एक बार फिर से अदन की खाड़ी में एक कॉमर्शियल जहाज को रेस्क्यू किया है। नेवी के मुताबिक बारबाडोस के फ्लैग वाले लाइबेरिया के जहाज पर हूती विद्रोहियों ने मिसाइल से हमला किया था। इसके बाद जहाज में आग लग गई। इस दौरान 3 क्रू मेंबर्स की मौत हो गई और 6 लोग घायल हुए। भारतीय नौसेना ने इस जहाज पर मौजूद 21 लोगों को बचा लिया है। इनमें से एक भारतीय है। अमेरिकी मीडिया सीएनएन के मुताबिक, ‘ट्रू कॉन्फिडेंस’ नाम के जहाज पर 6 मार्च को हमला हुआ था। ये हूती विद्रोहियों का पहला ऐसा हमला है जिसमें लोगों की जान गई है। तस्वीर इटली के रेवेना पोर्ट पर खड़े ‘ट्रू कॉन्फिडेंस’ नाम के जहाज की है। इसके 3 क्रू मेंबर हूतियों के हमले में मारे गए हैं।

आईएनएस कोलकाता मदद के लिए पहुंचा

नौसेना के प्रवक्ता कमांडर विवेक मधवाल ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी दी। उन्होंने कहा- जहाज पर हुए हमले की जानकारी मिलने के बाद आईएनएस कोलकाता को रवाना किया गया था। इस पर मौजूद हेलिकॉप्टर और बोट की मदद से लोगों को बचाया गया। घायलों का इलाज मेडिकल टीम कर रही है। भारतीय नौसेना ‘ट्रू कॉन्फिडेंस’ जहाज के क्रू मेंबर्स को रेस्क्यू करने के बाद आईएनएस कोलकाता पर ले आई। भारतीय नौसेना ने अदन की खाड़ी में जहाज से 21 लोगों को बचाने वाला यह वीडियो शेयर किया है।

हमले के बाद जहाज डूबा

2 मार्च को लाल सागर में लगातार हो रहे हूतियों के हमलों के बीच पहली बार कोई जहाज डूब गया था। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, हूती विद्रोहियों ने 18 फरवरी को बाब-अल मंडब स्ट्रेट में रूबीमार नाम के जहाज पर मिसाइल से अटैक किया था। इसके बाद जहाज के क्रू मेंबर्स को ब्रिटिश मिलिट्री ने रेस्क्यू किया।

मीडिया हाउस इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक रूबीमार एक ब्रिटिश जहाज था। इस पर बेलीज का फ्लैग लगा हुआ था। हूतियों ने जब इस पर हमला किया तब यह यमन के मोखा पोर्ट से करीब 27.78 किमी की दूरी पर था। पिछले 12 दिनों से यह उत्तर की तरफ बढ़ रहा था, लेकिन लाल सागर में तूफान और खराब मौसम की वजह से जहाज डूब गया।

कौन हैं हूती विद्रोही

साल 2014 में यमन में गृह युद्ध शुरू हुआ। इसकी जड़ शिया-सुन्नी विवाद है। कार्नेजी मिडिल ईस्ट सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों समुदायों में हमेशा से विवाद था जो 2011 में अरब क्रांति की शुरुआत से गृह युद्ध में बदल गया। 2014 में शिया विद्रोहियों ने सुन्नी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

इस सरकार का नेतृत्व राष्ट्रपति अब्दरब्बू मंसूर हादी कर रहे थे। हादी ने अरब क्रांति के बाद लंबे समय से सत्ता पर काबिज पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह से फरवरी 2012 में सत्ता छीनी थी। हादी देश में बदलाव के बीच स्थिरता लाने के लिए जूझ रहे थे। उसी समय सेना दो फाड़ हो गई और ये ही अलगाववादी हूती से नाम से मशहूर हो गए।

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