नई दिल्ली। माफिया मुख्तार अंसारी के छोटे बेटे उमर अंसारी को को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। उमर अंसारी को 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में दर्ज एक आपराधिक मामले में कोर्ट ने गिरफ्तारी से राहत दे दी है। न्यायाधीश ऋषिकेश रॉय और न्यायाधीश पीके मिश्रा की पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने संबंधी अंसारी की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। उमर अंसारी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि इस संबंध में मुख्य आरोपी को नियमित जमानत दे दी गई है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पिछले वर्ष 19 दिसंबर को अंसारी की अग्रिम जमानत याचिका खरिज कर दी थी और कहा था कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर गौर करने से ऐसा लगता है कि अपराध हुआ है।
मऊ जिले के कोतवाली पुलिस थाने में चार मार्च 2022 को अब्बास अंसारी (मऊ सदर सीट से एसबीएसपी उम्मीदवार), उमर अंसारी और 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि तीन मार्च 2022 को पहाड़पुर मैदान में आयोजित एक जनसभा में अब्बास अंसारी, उमर अंसारी और आयोजक मंसूर अहमद अंसारी ने मऊ प्रशासन से हिसाब किताब बराबर करने की बात कही थी।
यह मामला चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का है। फिलहाल अलग अलग मामलों में इस समय मुख्तार अंसारी और विधायक भाई अब्बास अंसारी जेल में हैं। उमर की मां अफ्शां अंसारी के खिलाफ भी कई मामलों में केस दर्ज किया गया है।
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मौर्य को बड़ी राहत, आपराधिक कार्यवाही पर लगाई रोक
नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य पर हिंदुओं की आस्था को आहत करने का आरोप है। इसी बीच रामचरितमानस पर विवादित टिप्पणी के बाद कठोर अदालती कार्यवाही की आशंका से घिरे मौर्य को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। शीर्ष अदालत ने गुरुवार को मौर्य के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सवाल किया कि यह इतना संवेदनशील मुद्दा क्यों है, जिसमें बयान के आधार पर आपराधिक कार्यवाही की अपील की जा रही है।
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