इस्लामाबाद, आठ अक्टूबर (एपी) तालिबान शासित अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उसने ब्रिटेन के लंदन और ऑस्ट्रिया के विएना में स्थित अपने दूतावासों में राजनयिक सेवाओं को निलंबित कर दिया है तथा उसने ऐसा उनमें पारदर्शिता की कमी और काबुल के साथ उचित सहयोग नहीं करने की वजह से किया है। अफगानिस्तान के अधिकतर दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में पश्चिमी देशों के समर्थन वाली पूर्वर्ती सरकार द्वारा नियुक्त कर्मचारी ही कार्यरत हैं। करीब एक दर्जन दूतावास और वाणिज्य दूतावास तालिबान के प्रशासन के पूर्ण नियंत्रण में हैं। कुछ देशों ने अफगानिस्तान में राजनयिक मिशन को तैनात रखा है, जिनमें पाकिस्तान, तुर्किये, कतर और चीन शामिल हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने तालिबान को आधिकारिक तौर पर मान्यता नहीं दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल कहर बल्खी ने कहा कि दोनों दूतावासों (लंदन और विएना) में राजयनिक सेवाओं को तत्काल प्रभाव से एवं अगली सूचना तक निलंबित किया जा रहा है। इस कदम से वीज़ा जारी करने और पासपोर्ट की अवधि में विस्तार देने जैसी सेवाएं प्रभावित होंगी।
यह पूछे जाने पर कि क्या मंत्रालय अन्य दूतावासों की गतिविधियों को देख रहा है, बल्खी ने कहा, हां क्योंकि यह मंत्रालय की सामान्य प्रक्रिया है। इस घटनाक्रम से कुछ दिन पहले, स्पेन और नीदरलैंड में अफगानिस्तान के दूतावासों ने बयान जारी कर काबुल में तालिबान अधिकारियों के साथ उनके समन्वय और बातचीत पर जोर दिया था। मंत्रालय के उप प्रवक्ता जिया अहमद तकल ने नीदरलैंड में स्थित दूतावास के बयान को अफगान लोगों के लिए एक सकारात्मक कदम बताया था क्योंकि सभी वाणिज्य सेवाओं या दूतावास के मामलों का काबुल से सीधा संबंध होता है। तकल ने कहा था, “कर्मचारियों, अधिकारियों और राजनयिकों के वेतन और खर्च का भुगतान अफगान सरकार करेगी।” भारत ने पिछले हफ्ते कहा था कि दिल्ली में स्थित अफगानिस्तान का दूतावास काम कर रहा है, लेकिन राजनयिक कर्मचारियों ने कहा कि भारत में राजनयिक समर्थन की कमी और काबुल में मान्यता प्राप्त सरकार न होने की वजह से दूतावास को बंद किया जा रहा है। एपी नोमान नेत्रपाल
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