20 हजार की मौत, आधा शहर ही हो गया खत्म

-लीबिया बाढ़

त्रिपोली। लीबिया में आई भीषण समुद्री बाढ़ के चलते 20 हजार से ज्यादा लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है। इस बीच अथॉरिटीज ने कहा है कि इन घटनाओं की जांच की जाए। लीबिया के आधुनिक इतिहास की यह सबसे बड़ी तबाही है, जिसमें मारे गए लोगों की लाशें तक बरामद नहीं हो पा रही हैं। बचाव अभियान में शामिल लोगों का कहना है कि समुद्र में आई बाढ़ शहर में घुस आई थी और उसके पानी के साथ ही बहुत से लोग बह गए। माना जा रहा है कि इनमें से ज्यादातर की मौत हो गई है, लेकिन शवों की तलाश करना मुश्किल हो रहा है। लीबिया के डेरना शहर का लगभग आधा हिस्सा पूरी तरह तबाह हो गया है। डेरना शहर के मेयर अब्दुलमेनाम अल-घाइठी ने कहा कि शहर में मरने वालों का आंकड़ा 18 से 20 हजार तक पहुंच गया है। यही नहीं उन्होंने कहा कि अब बड़ा डर इस बात का है कि महामारी फैल सकती है। पानी में शव सड़ रहे हैं और सड़कों पर पानी के साथ गंदगी बह रही है। इसके चलते बीमारियों का खतरा पैदा हो गया है। इस बीच विश्व मौसम संगठन का कहना है कि लीबिया में इतनी ज्यादा मौतों को टाला जा सकता था। संगठन ने कहा कि लीबिया बीते एक दशक से गृह युद्ध की मार झेल रहा है और देश में दो अलग-अलग सरकारों का शासन चल रहा है। हालत यह है कि लीबिया में मौसम विभाग ही सक्रिय नहीं है।

मिनटों में इमारतें ढहीं

डेरमा शहर की यह बाढ़ इतनी भीषण थी कि मिनटों के अंदर विशाल इमारतें ढह गईं। कई ऐसे परिवार हैं, जो पूरी तरह से तबाह हो गए और कोई सदस्य ही नहीं बचा। एक शख्स ने बताया कि उसने अपने संयुक्त परिवार के 13 सदस्यों को इस आपदा में खो दिया है। बाढ़ की भयावहता को इससे समझा जा सकता है कि शवों को सामूहिक तौर पर दफन किया जा रहा है और जेसीबी की मदद से कब्रों को खुदवाया जा रहा है। अफ्रीकी देश लीबिया में बीते 10 सालों से गृह युद्ध की स्थिति और इन्फ्रास्ट्रक्चर बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।

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