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—जोशीमठ को बचाने की कवायद, जमीन के नीचे पानी, ढ़ूंढ़ा जाएगा स्त्रोत
— होटल गिराने को लेकर मालिकों ने किया जमकर हंगामा
— केंद्रीय टीम ने सीएम धामी से की मुलाकात, दिया सुझाव
— 678 मकानों में दरारें, 81 परिवार विस्थापित
इंट्रो
जोशीमठ को बचाने की कवायद शुरू हो चुकी है। सबसे पहले यहां के दो होटल्स-मलारी इन और माउंट व्यू को गिराया जाना था। जब जेसीबी और टीम पहुंची तो होटल मालिकों ने हंगामा खड़ा कर दिया। इससे होटल गिराने का काम रुक गया। इधर, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। इस बीच, केंद्र सरकार ने मंगलवार को ऐलान किया कि जोशीमठ में सूक्ष्म भूकंप अवलोकन प्रणाली स्थापित की जाएगी। इससे भूकंप की निगरानी हो सकेगी।
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देहरादून। केंद्रीय गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों ने जोशीमठ की स्थिति के बारे में जानने के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। ‘सब्सिडेंस जोन’ (प्रभावित क्षेत्र) में भूमिगत जल जमाव के स्थान का पता लगाने की जरूरत पर जोर दिया। ऐसा माना जा रहा है कि जमीन के नीचे पानी जहां जमा हुआ है। वह इलाका जोशीमठ में है लेकिन अभी पानी के स्रोत का पता नहीं चल पाया है। अधिकारियों के केंद्रीय दल ने कहा कि प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए पहचाने गए क्षेत्रों का भी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण किया जाना चाहिए। आपदा प्रबंधन सचिव रंजीत सिन्हा ने सोमवार को पत्रकारों को बताया कि इस मुद्दे को हल करने के लिए संबंधित सभी संस्थानों के वैज्ञानिकों की मदद ली जाएगी और राज्य सरकार को केंद्र की ओर से हर संभव सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय टीम से कहा कि जोशीमठ सांस्कृतिक, धार्मिक और सामरिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण शहर है और इसके जीर्णोद्धार के लिए एकीकृत प्रयासों की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि इलाके को बचाने और प्रभावित क्षेत्र में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। सिन्हा ने कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रभावित शहर के लोगों के लिए एक राहत पैकेज तैयार कर रही है, जिसे जल्द ही केंद्र को भेजा जाएगा। जोशीमठ में जमीन धंसने से बुरी तरह प्रभावित दो होटलों को ‘यांत्रिक रूप से हटाने’ का भी फैसलाा किया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा-
लोकतांत्रिक संस्थाएं मामले को देख रहीं
सुप्रीम कोर्ट ने जोशी मठ पर दायर की गई स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट 16 जनवरी को इस मामले की सुनवाई करेगा। सीजेआई ने कहा, हर जरूरी चीज हमारे पास नहीं आनी चाहिए। इस पर गौर करने के लिए लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित संस्थाएं हैं। हम इसे सुनवाई के लिए 16 जनवरी को सूचीबद्ध करेंगे। प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा की पीठ ने जोशीमठ के अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा दायर याचिका को 16 जनवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
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होटल मालिकों ने कहा-
होटल गिराने से पहले देना था नोटिस
दो होटल मलारी इन और होटल माउंट व्यू गिराए जाएंगे। होटल मलारी इन के मालिक ठाकुर सिंह राणा ने कहा, अगर लोगों के भले के लिए इमारत गिराई जानी है तो मैं सरकार के साथ हूं। फिर चाहे जरा सी ही दरार ही क्यों न आई हो। लेकिन मुझे नोटिस तो दिया जाना था। होटल का मूल्यांकन करते। मैंने ऐसा करने को कहा है। इसके बाद मैं चला जाऊंगा।
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प्रदर्शनकारी बोले
पहले मुआवजा, फिर गिराए होटल
जोशीमठ में प्रशासन बुधवार से 2 होटलों को गिराना शुरू करेगा। इससे पहले स्थानीय लोग और होटल का स्टाफ सड़कों पर बैठकर प्रदर्शन कर रहा है। इस विरोध प्रदर्शन में कई महिलाएं सड़कों पर बैठी हुई हैं। लोगों की मांग है कि होटल तभी गिराने दिया जाएगा, जब उन्हें उचित मुआवजा मिल जाएगा।
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केंद्रीय मंत्री ने बताया जमीन धंसने का कारण!
भूमि, विज्ञान मंत्री जितेंद्र सिंह ने इंडो यूके वर्कशॉप ऑफ जियोसाइंसेज के दौरान बताया कि जोशीमठ बेहद संवेदनशील भूकंप जोन पांच के तहत आता है। यहां लगातार भूंकपीय तनाव बना रहता है। इसके चलते इस इलाके में हल्के भूकंप आते रहते हैं। माना जा रहा है कि इन हल्के भूकंपों के कारण ही जोशीमठ की जमीन में मौजूद पत्थरों की ताकत कम हुई है। इसके अलावा पर्यावरणीय कारणों जैसे पहाड़ों से बड़ी मात्रा में पानी के बहकर पहाड़ों के दर्रों में जाने से, उसके दबाव से भी जोशीमठ की जमीन में दरारें बढ़ रही हैं।
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100 जगहों पर लगेगी निगरानी प्रणाली
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि विज्ञान मंत्रालय अगले पांच सालों में जोशीमठ समेत 100 जगहों पर माइक्रो सेसेमिक निगरानी प्रणाली स्थापित करेगा। बीते दो साल में 37 माइक्रो सेसेमिक ऑब्जर्वेशन प्रणाली देशभर में स्थापित किए जा चुकी हैं। इनकी मदद से भूकंपीय रियल टाइम डाटा मिल सकेगा। जिससे जमीन के इस तरह धंसाव का कारण पता चल सकेगा। साथ ही इस डाटा की मदद से आवासों और बुनियादी ढांचे के सुरक्षित निर्माण में मदद मिल सकेगी।
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