ज्ञानवापी परिसर में कमीशन की कार्रवाई के दौरान वजूखाने की जांच के लिए पानी और मलबा निकालकर सर्वे की कार्रवाई को पूरा किया गया। ढाई घंटे तक चली कार्रवाई के बाद बाहर निकले वादी पक्ष के चेहरे प्रसन्नता से खिले हुए थे। वहीं सुबह से ही सुरक्षा के इंतजाम रोज की तरह ही सख्त रहे, हालांकि सोमवार का दिन और वैशाख पूर्णिमा होने के कारण श्रद्धालुओं के लिए थोड़ी ढील दी गई थी, लेकिन दुकानों पर पाबंदी यथावत रही। सोमवार को सुबह छह बजे से ही गोदौलिया से मैदागिन के बीच में सुरक्षाकर्मियों की चहलकदमी शुरू हो गई। साढ़े सात बजे से ही परिसर में वादी-प्रतिवादी पक्ष के लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। वजूखाने से पानी निकालने के लिए जलकल विभाग की टीम और मलबा निकालने के लिए नगर निगम के दस्ते को पहले ही बुला लिया गया था। नगर निगम की टीम मछली निकालने के लिए जाल भी साथ लाई थी।
कमीशन के निर्देश पर जलकल विभाग की टीम ने पहले वजूखाने से मछलियों को बाहर एक पानी के टैंक में निकलवाया। इसके बाद वजूखाने का पानी निकाला गया। करीब 10 हजार लीटर पानी की निकासी की गई। इसके बाद वजूखाने से मलबे को बाहर निकलवाकर सात फीट से अधिक की गहराई में टीम के सदस्य उतरे।
मलबे के नीचे शिवलिंग देखकर सभी आश्चर्य में पड़ गए। वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी के बाद सभी सदस्य एक-एक करके बाहर निकल आए। 10:30 बजे तक सर्वे करने वाली पूरी टीम ज्ञानवापी परिसर से बाहर आ गई। इसके बाद 11 बजे से गोदौलिया से मैदागिन मार्ग पर यातायात सामान्य हो सका।
शिवलिंग में नहीं होता छेद, सींक डाल कोर्ट कमिश्नर ने देखा : मुस्लिम पक्ष
वहीं, मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता रईस अहमद अंसारी ने कहा है कि कोर्ट ने हमें बिना सुने वजूखाने को सील करने का आदेश दिया। इस आदेश के खिलाफ आज याचिका दायर करेंगे। उन्होंने कहा कि कमीशन की कार्रवाई के दौरान वजूखाने का पानी निकलवाया गया। वह एक हौद है। तकरीबन 20 या 25 फीट का है।
वजूखाने के चारों तरफ नल लगे हैं। बीच में गोल वाल्व की तरह फव्वारा है, जो शंकु के आकार का है। इसके बीच में छेद है। शिवलिंग में छेद नहीं होता है। हम लोगों ने कोर्ट कमिश्नर से कहा कि यह फव्वारा है। उन्होंने छेद में सींक डाली, तकरीबन 35 फीट अंदर तक सींक चली गई।
उन्होंने कहा कि कमीशन की तीसरे दिन की कार्रवाई के दौरान वादी पक्ष के अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट के वकील हरिशंकर जैन के बेटे विष्णु जैन मौजूद रहे। उन्होंने 10 बजे के आसपास कहा कि पिता हरिशंकर जैन की तबीयत ठीक नहीं है। कमीशन की कार्रवाई के दौरान मोबाइल नहीं ले जा सकते हैं। मोबाइल मंगाकर विष्णु जैन ने पिता से बातचीत कर उन्हें कोर्ट भेज दिया।
मुझे लगता है, उनकी तबीयत खराब नहीं थी। कोर्ट ने फौरी आवेदन पर आदेश दे दिया। इसकी सूचना हमें रास्ते में मिली। अमूमन अदालत में 12 बजे तक कोई आवेदन पड़ता है तो दो बजे तक आदेश होता है। नियम है कि अधिवक्ताओं की गैर मौजूदगी में कोई आदेश पारित नहीं किया जाता है।
कमीशन की कार्रवाई होती है तो दोनों पक्षों को सुना जाता है। रिपोर्ट मंगलवार को दाखिल होना है। इसके पहले सोमवार को आदेश आ गया। इस मामले में कमेटी के साथ बैठकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

