भक्तों से एक पैसा नहीं लेते फिर भी बाबा की शहर-दर-शहर प्रॉपर्टी, महंगी कारें-प्राइवेट आर्मी

  • बाबा की खुलने लगी पोल.

-यूपी के कई शहरों में है बाबा के ठिकाने

-बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट में करते हैं बड़ी संख्या में लोग काम

(फोटो : बाबा भोलेनाथ)

नई दिल्ली। हाथरस सत्संग में हुए हादसे के बाद बाबा (सूरजपाल) चर्चा में हैं। वे फिलहाल फरार है और पुलिस उसे सरगर्मी से तलाश रही है। उनका असली नाम सूरजपाल सिंह जाटव है। वे अपने अलग अंदाज भी लिए जाने जाते हैं। वेश-भूषा देखकर कोई नहीं कह सकता है कि ये बाबा हैं, और कई राज्यों में इनके हजारों भक्त हैं। अब धीरे-धीरे बाबा की पोल खुल रही है। फिलहाल बाबा के भक्त उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के अलावा देश के दूसरे हिस्सों में भी मौजूद हैं। जो सत्संग में आशीर्वाद लेने पहुंचते थे। सूरजपाल सिंह जाटव एटा जिले से अलग हुए कासगंज के पटियाली के बहादुरनगर गांव के निवासी हैं। वैसे बाबा का अब अपने गांव आना-जाना कम रहता है। लेकिन बहादुरनगर बाबा की जन्मस्थली के रूप में मशहूर है, जहां रोजाना लोगों की बड़ी भीड़ पहुंचती है।

बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट

बहादुरनगर में बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट है, यहां सैकड़ों लोग काम करते हैं। ट्रस्ट के एक सदस्य ने बताया कि बाबा के नाम पर यहां 20-25 बीघा जमीन है, जहां खेती होती है। इसके अलावा ट्रस्ट के लोगों का यहां आने वाले भक्तों को कोई दिक्कत न हो, इस काम को देखते हैं। बहादुरनगर ट्रस्ट में बड़ी संख्या में महिला सेवादार भी हैं। उत्तर प्रदेश के नोएडा में बाबा का आश्रम बताया जा रहा है। इसके अलावा सूबे कई राज्यों में भी बाबा के ठिकाने हैं।

कई आश्रम हो चुके स्थापित

दिलचस्प ये भी है कि कथित भोले बाबा अपने भक्तों से कोई दान, दक्षिणा या चढ़ावा नहीं लेते हैं। लेकिन इसके बावजूद उनके कई आश्रम स्थापित हो चुके हैं। उत्तर प्रदेश में कई दूसरे स्थानों पर स्वामित्व वाली जमीन पर आश्रम स्थापित करने का दावा भी किया जा रहा है। खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बाबा के कई एकड़ जमीन पर आश्रम हैं, जहां लगातार सत्संग के कार्यक्रम चलते रहते हैं। बाबा के अनुयायियों में सबसे बड़ा वर्ग अनुसूचित जाति-जनजाति और ओबीसी वर्ग का है।

मकान को मंदिर का दर्जा

स्वंयभू ‘भोले बाबा’ पहले आगरा के एक छोटे से मकान में रहते थे। अब उस मकान को मंदिर का दर्जा दे दिया गया है। लोग अब उस ताला लगे मकान को बाबा की कुटिया कहते हैं। लेकिन आसपास के लोगों की मानें तो ये बाबा का सेफ हाउस भी है। जहां बाबा अक्सर आते हैं और आराम करते हैं। हालांकि वैसे आमतौर पर इस मकान पर ताला ही लगा रहता है।

प्राइवेट आर्मी से घिरे रहते थे बाबा

बाबा के पास लग्जरी कारों का काफिला है और खुद की वर्दीधारी फौज भी है। जब भी बाबा कहीं निकलते थे उसके आसपास प्राइवेट कमांडो और फौज होती है। इस लंबी चौड़ी फौज को आश्रम के सेवादार कहा जाता है। बाबा हमेशा सफेद कपड़ों में तैनात निजी सुरक्षाकर्मियों के घेरे में होते हैं, कार्यक्रम में भी सुरक्षा का जिम्मा सेवादार के ऊपर होता है। खबरों की मानें तो बाबा की खुद की आर्मी है, जिसमें महिला कमांडो और पुरुष कमांडो शामिल हैं। प्रवचन के दौरान मैनेजमेंट का सारा जिम्मा इसी प्राइवेट आर्मी पर रहता था। यहां तक कि पुलिस को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं होती थी। सीएम योगी से लेकर पूरा प्रशासन बोल चुका है कि कैसे बाबा की आर्मी पुलिस प्रशासन को आयोजन स्थल में एंट्री करने नहीं देती थी। जानकारी के अनुसार सूरज पाल सिंह ने अपनी खुद की नारायणी सेना बनाई थी, जिसमें अधिकतर महिला गार्ड थीं, यह सेना आश्रम से लेकर सत्संग तक बाबा की सेवा करती थी। इस सेना का एक खास ड्रेस कोड भी रखा गया था।

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