पुरातात्विक महत्व की वस्तुओं को संरक्षित रखा जाए

हाईकोर्ट ने दिए निर्देश

बिलासपुर। चिरमिरी के पुरातात्विक और ऐतिहासिक मूर्तियों को बचाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता गिरीश कुमार दुबे ने जनहित याचिका लगाई थी। इस पर अंतिम सुनवाई करते हुए मंगलवार को हाईकोर्ट ने शासन को पुरातात्विक महत्व की वस्तुओं को संरक्षित रखने का निर्देश देते हुए याचिका निराकृत कर दी है।

सामाजिक कार्यकर्ता गिरीश कुमार दुबे ने अपने अधिवक्ता आशीष बेक के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि चिरमिरी एक ऐतिहासिक जगह है। यहां पर इसके ऐतिहासिक होने का लेख भी है, जिसके मुताबिक यहां जमीन के नीचे 14वीं ,15वीं और 16वीं शताब्दी की मूर्तियां मिली है। साथ ही और ऐतिहासिक घटनाओं का वर्णन और चित्र मूर्तियों में अंकित है। अब एसईसीएल यहां खुदाई कर रही है, वह भी किसी पुरातत्व एक्सपर्ट के बगैर। सिर्फ मजदूर है काम कर रहे हैं और उनकी खुदाई से जमीन में गड़ी हुई ऐतिहासिक और पुरातात्विक मूर्तियों को नुकसान पहुंच रहा है। अब खुदाई सती मंदिर के पास तक पहुंच गई है। यहां की खुदाई को रुकवाने की मांग करते हुए याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट की शरण ली। पहले हुई सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस की डीविजन बेंच ने सती मंदिर के आसपास खुदाई किए जाने पर आगामी सुनवाई तक रोक लगा दी थी।

शासन ने रखा जवाब

मंगलवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस एन के चन्द्रवंशी की डिविजन बेंच में शासन ने पेश किए अपने जवाब में बताया कि पुरातात्विक मूर्तियों को संग्रहालय या सबंधित स्थान पर सुरक्षित रखे जाने का इंतजाम किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने बहस के बाद याचिका निराकृत करते हुए शासन को पुरातात्विक वस्तुओं को भली प्रकार संरक्षित करने का निर्देश दिया है।


पीएससी मामले में आज सुनवाई

छग पीएससी में गड़बड़ी को लेकर पूर्व मंत्री और बीजेपी विधायक ननकीराम कंवर ने याचिका लगाई है। इसमें कहा गया है कि अपात्रों को भी चयनित कर लिया गया है। इसमें नेताओं, मंत्रियों और अधिकारियों के बेटे-बेटियां और रिश्तेदार शामिल हैं। इन लोगों को डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और दूसरे पद दे दिए गए हैं। मामले की सुनवाई बुधवार को होगी। याचिका में ननकीराम कंवर ने राजभवन में सचिव अमृत खलको के बेटे और बेटी के डिप्टी कलेक्टर बनने पर सवाल उठाया है। वहीं पीएससी चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी के रिश्तेदारों के चयन को भी गलत माना है। याचिका में कहा गया है कि पीएससी में जिम्मेदार पद पर बैठे लोगों ने चहेते लोगों को रेवड़ियों की तरह नौकरी बांटी और करोड़ों का भ्रष्टाचार किया गया है।

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