रिपोर्ट नफरत पैदा कर सकती है, लेकिन कठोर कदम न उठाए सरकार

हाईकोर्ट ने पत्रकार सुधीर चौधरी को दी राहत

बेंगलुरु। कर्नाटक हाईकोर्ट ने शुक्रवार को न्यूज एंकर सुधीर चौधरी को अंतरिम राहत दे दी। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि पत्रकार एंकर सुधीर चौधरी के खिलाफ जांच के लिए प्रथम दृष्टया मामला बनता है। हालांकि कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को निर्देश दिया कि वह सुधीर चौधरी के खिलाफ कोई कठोर कदम न उठाए। सुधीर चौधरी ने कर्नाटक पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दायर प्राथमिकी को रद्द करने के लिए कल उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने कहा, “मीडिया की भूमिका जानकारी प्रदान करना है लेकिन यह वह जानकारी नहीं है जो प्रदान की जानी है। ऐसा नहीं है कि लाभ केवल अल्पसंख्यकों को दिया जाता है। ..यह केवल अल्पसंख्यकों तक ही सीमित नहीं है। आरोप यह लगाया गया कि सरकार केवल अल्पसंख्यकों को योजना प्रदान कर रही है और हिंदुओं को वंचित कर रही है। इसलिए प्रथम दृष्टया यह जांच का मामला है।”

यह है मामला

कर्नाटक पुलिस ने राज्य सरकार की वाणिज्यिक वाहन रियायत योजना के बारे में गलत जानकारी देने के आरोप में एक हिंदी समाचार चैनल और उसके सलाहकार संपादक सुधीर चौधरी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। शिकायतकर्ता ने सलाहकार संपादक पर निगम की योजना के बारे में झूठी खबर फैलाने और राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया। प्राथमिकी के मुताबिक, 11 सितंबर को एक समाचार कार्यक्रम में सलाहकार संपादक सुधीर चौधरी ने दावा किया कि कर्नाटक सरकार ऐसी योजना चला रही है जिसका लाभ केवल अल्पसंख्यकों को मिलता है, गैर-अल्पसंख्यक हिंदुओं को नहीं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया, ‘इस तरह की खबरें प्रकाशित करके हिंदुओं और अन्य धर्मों के बीच नफरत फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। सुधीर जो बात कह रहे हैं, उससे पूरी तरह वाकिफ होने के बावजूद ऐसी खबरें प्रकाशित कर वह राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश रच रहे हैं।”

00000000

प्रातिक्रिया दे