भारत-चीन तनातनी के बीच हाशीमार पहुंचे सीडीएस

-दुर्गम क्षेत्रों का किया दौरा, सेना का बढ़ाया मनोबल

-गृहमंत्री शाह आज पहुंचेंगे अरुणाचल, देंगे सौगात

-चाइना बॉर्डर से लगे गांवों का किया जाएगा विकास

(फोटो : हाशीमार)

नई दिल्ली। भारत-चीन तनातनी के बीच, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस), जनरल अनिल चौहान ने अग्रिम क्षेत्र का दौरा किया। वे उत्तर बंगाल में वायु सेना स्टेशन हाशीमार पहुंचे और जीओसी, त्रिशक्ति कोर आगे के क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान सीडीएस ने बुनियादी ढांचे की प्रगति की समीक्षा की। क्षेत्र में विकास और परिचालन और रसद तैयारियों का जायजा लिया। सीडीएस ने दूरदराज के इलाकों में तैनात सैनिकों के साथ व्यापक बातचीत की और उनके उच्च मनोबल और पेशेवराना अंदाज की सराहना की।

रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि इसके बाद सीडीएस ने सुकना में त्रिशक्ति कोर के मुख्यालय का दौरा किया, जहां उन्हें सिक्किम में उत्तरी सीमाओं पर परिचालन स्थिति के बारे में जानकारी दी गई। सीडीएस ने पूर्वी सिक्किम में हाल ही में हिमस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की आपात स्थिति के समय नागरिक प्रशासन और स्थानीय आबादी की सहायता के लिए बल संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए गठन की सराहना की। उन्होंने फॉर्मेशन से कठिन प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करने और हर समय सतर्क रहने के लिए प्रेरित किया।

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शाह आज अरुणाचल में, शुरू होगी वीवीपी

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 10 और 11 अप्रैल को अरुणाचल प्रदेश का दौरा करेंगे। इस दौरान वह चीन की सीमा से लगे एक गांव किबिथू में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (वीवीपी) का शुभारंभ करेंगे। इस कार्यक्रम को लेकर गृह मंत्रालय (एमएचए) ने बयान जारी कहा, “केंद्र सरकार ने 4,800 करोड़ रुपये के केंद्रीय मदद के साथ वीवीपी को मंजूरी दे दी है, जिसमें वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2025-26 के लिए विशेष रूप से सड़क संपर्क के लिए 2,500 करोड़ रुपये शामिल हैं।” गृह मंत्रालय (एमएचए) ने बयान में कहा “वीवीपी केंद्र की एक बेहतरीन परियोजना है, जिसके तहत अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में उत्तरी सीमा से सटे 19 जिलों के 46 ब्लॉकों के 2,967 गांवों को व्यापक विकास के लिए चिन्हित किया गया है।

जीवन गुणवत्ता में सुधार

पहले चरण में आंध्र प्रदेश में 455 सहित 662 गांवों की प्राथमिकता कवरेज के लिए पहचान की गई है। मंत्रालय ने कहा कि पहचान किए गए सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करेगा और लोगों को अपने मूल स्थानों पर रहने के लिए प्रोत्साहित करेगा। जिससे इन गांवों से पलायन को रोका जा सके और सीमा की सुरक्षा को बढ़ाया जा सके। जिला प्रशासन, ब्लॉक और पंचायत स्तरों पर बेहतर योजनाओं के तहत काम किया जा रहा है।

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